Futures Se Hedge Kaise Kare: 10 लाख के पोर्टफोलियो का पूरा हिसाब, उदाहरण के साथ

futures se hedge kaise kare

बाज़ार गिरने की खबर आती है। मन में पहला सवाल उठता है कि मेरा पोर्टफोलियो अब कितना कटेगा। इसलिए अगर आप भी यही सोच रहे हैं, तो Futures se hedge kaise kare यहीं से समझिए। साथ ही, यह लेख सिर्फ शिक्षा के लिए है।

इसमें हर संख्या काल्पनिक है। यह कोई खरीद-बिक्री की सलाह नहीं है।

Futures Se Hedge Kaise Kare in Hindi

सालों की मेहनत से बना पोर्टफोलियो कटता देखना आसान नहीं होता। लेकिन हर गिरावट पर शेयर बेच देना भी समझदारी नहीं है।

इसी वजह से कई निवेशक शेयर रखकर थोड़े समय की सुरक्षा चाहते हैं। यानी वे नुकसान का एक हिस्सा दूसरी तरफ से पूरा करते हैं।

Futures से हेज इसी सोच का तरीका है। पर इसकी कीमत भी होती है।

लंबी अवधि के निवेशक हेज क्यों करते हैं?

लंबे निवेश का फायदा बड़ा होता है, जैसा 1000 ki SIP 10 saal baad kitni hogi के हिसाब में दिखता है। इसलिए निवेशक शेयर बेचना नहीं चाहते।

वे सिर्फ बीच की गिरावट से बचना चाहते हैं। अब आगे हम 10 लाख के उदाहरण से पूरा हिसाब देखेंगे।

निफ्टी फ्यूचर्स से शेयर पोर्टफोलियो को हेज करने का पूरा तरीका और 10 लाख रुपये के पोर्टफोलियो का उदाहरण।

यहां हम सिर्फ futures की बात करेंगे। Options से बचाव का तरीका अलग है, इसलिए उसकी चर्चा यहां नहीं है।

Futures Trading Kya Hota Hai?

Futures एक तय तारीख वाला सौदा है। यानी भाव आज तय होता है, पर सौदा expiry पर पूरा होता है।

सबसे पहले बुनियादी नियम और लॉट की जानकारी चाहिए। इसके लिए फ्यूचर्स ट्रेडिंग की पूरी जानकारी पढ़ लीजिए। इसलिए यहां हम उसे नहीं दोहराएंगे।

फ्यूचर्स से हेज करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

हेज के लिए बस तीन बातें चाहिए:

  • सबसे पहले, आपका पोर्टफोलियो कितना बड़ा है
  • दूसरा, Nifty futures का भाव क्या है
  • तीसरा, एक lot में कितनी मात्रा है

Futures Hedging Guide: 10 लाख के पोर्टफोलियो को कैसे हेज करें?

मान लीजिए आपके पास 10 लाख रुपये के शेयर हैं। साथ ही, ये शेयर लगभग Nifty की तरह चलते हैं।

आगे की सभी संख्याएं सिर्फ समझाने के लिए हैं। उदाहरण के लिए, Nifty futures का भाव 20,000 और एक lot में 25 मात्रा मान लेते हैं।

असली lot का आकार एक्सचेंज बदलता रहता है। इसलिए कुछ भी करने से पहले NSE की वेबसाइट पर मौजूदा lot size देखिए।

Hedge Ratio Kya Hota Hai?

सबसे पहले सवाल यह है कि कितने lot बेचने चाहिए। इसका जवाब hedge ratio देता है।

यह पोर्टफोलियो की कीमत को एक lot के मूल्य से भाग देकर निकलता है। सूत्र यह है: lot की संख्या = पोर्टफोलियो का मूल्य ÷ (futures का भाव × एक lot की मात्रा)।

हमारे उदाहरण में एक lot का मूल्य 20,000 × 25 = 5,00,000 रुपये है। इसलिए 10,00,000 ÷ 5,00,000 = 2 lot आते हैं।

लेकिन उत्तर हमेशा इतना साफ नहीं आता। उदाहरण के लिए, Nifty 21,000 हो तो उत्तर लगभग 1.9 आता है। तब आप पास के पूर्ण lot तक पहुंचते हैं।

Futures Hedging Example: बाज़ार गिरे, चढ़े या वहीं रहे तो क्या होगा?

अब देखते हैं कि 2 lot बेचने के बाद तीन स्थितियों में क्या होता है। हमने मान लिया है कि पोर्टफोलियो ठीक Nifty जितना चलता है। साथ ही, खर्च इसमें जोड़े नहीं गए हैं।

बाज़ार का हालपोर्टफोलियो2 lot short futuresकुल नतीजा
5% गिरे50,000 रुपये का घाटा50,000 रुपये की कमाई0
5% चढ़े50,000 रुपये की कमाई50,000 रुपये का घाटा0
वहीं रहे000
10 लाख के पोर्टफोलियो पर बिना हेज, आधा हेज और पूरा हेज होने पर बाज़ार के गिरने या चढ़ने का तुलनात्मक ग्राफ
बाज़ार में 5% गिरावट या बढ़त होने पर नो हेज, आधा हेज और पूरा हेज का नतीजा।

इस उदाहरण से क्या सीख मिलती है?

यह नतीजा सिर्फ समझाने के लिए है। असली बाज़ार में खर्च और भाव का अंतर नतीजा बदल देते हैं। इसलिए परिणाम पूरी तरह शून्य नहीं आता।

सबसे ज़रूरी बात यह है: गिरावट में सुरक्षा मिली, लेकिन चढ़ाव का फायदा भी चला गया।

यानी हेज बीमा जैसा लगता है। पर इसका प्रीमियम पैसे में नहीं, छूटे हुए मुनाफे में चुकाना पड़ता है।

Nifty Futures Se Hedging में Margin कितना लगता है?

Short सौदा खोलने के लिए पूरा मूल्य नहीं देना पड़ता। सिर्फ एक हिस्सा जमा होता है, जिसे margin कहते हैं।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए यह हिस्सा 12 प्रतिशत है। तब 10,00,000 रुपये के 2 lot पर लगभग 1,20,000 रुपये चाहिए। यह भी सिर्फ समझाने के लिए है।

Margin का असली प्रतिशत कहां देखें?

असली margin रोज़ बदल सकता है। इसलिए उसे अपने ब्रोकर के ऐप और एक्सचेंज की वेबसाइट पर देखिए।

साथ ही, मार्जिन का मतलब और उसके नियम अलग से समझ लें, तो गलती कम होती है।

बाज़ार चढ़ने पर अतिरिक्त पैसा क्यों चाहिए?

Futures में रोज़ का घाटा आपके खाते से कटता है। इसलिए बाज़ार चढ़ने पर अतिरिक्त पैसा रखना पड़ सकता है।

इसी वजह से बड़ा सौदा करने से पहले अपनी जमा पूंजी का हिसाब रखिए।

Short Futures Hedge की लागत: Cost of Carry और Rollover क्या है?

Futures का भाव आमतौर पर आज के भाव से थोड़ा ऊपर रहता है। उदाहरण के लिए, आज Nifty 20,000 है और futures 20,100 पर है।

फिर expiry पास आने पर यह 100 अंकों का अंतर घटता जाता है। इसी अंतर को आसान भाषा में ढुलाई लागत (cost of carry) कहते हैं।

Rollover Kya Hota Hai? हेज एक महीने से ज़्यादा रखना हो तो

मान लीजिए आपको हेज एक महीने से ज़्यादा रखना है। तब expiry से पहले पुराना सौदा बंद करना पड़ता है। फिर अगले महीने का नया सौदा खोलना पड़ता है।

इसे रोलओवर कहते हैं।

इस दौरान बड़े खिलाड़ियों के long सौदे बंद होते हैं। इसे long unwinding kya hota hai में समझाया गया है।

Rollover का खर्च कितना भारी पड़ता है?

हर रोलओवर में ब्रोकरेज और सरकारी शुल्क फिर लगते हैं। साथ ही, नए महीने का भाव भी अलग होता है। इसलिए हेज को लंबे समय तक पकड़ना सस्ता नहीं रहता।

इन शुल्कों का हिसाब ब्रोकर की चार्ज सूची में मिलेगा। उधार जैसी ताकत से बने सौदे में खर्च भी बड़ा लगता है, और लेवरेज का सही अर्थ यही बताता है।

Futures Se Portfolio Hedge Kaise Kare: पूरा हेज या आंशिक हेज?

ज़रूरी नहीं कि आप पूरे पोर्टफोलियो को ढकें। कई लोग अपनी सुविधा से आधा हिस्सा ही सुरक्षित करते हैं।

आंशिक हेज का हिसाब: 1 Lot बेचने पर क्या होता है

उदाहरण के लिए, 2 की जगह सिर्फ 1 lot बेचें। तब लगभग आधी सुरक्षा मिलती है। नीचे उसी का हिसाब है।

बाज़ार का हालपोर्टफोलियो1 lot short futuresकुल नतीजा
5% गिरे50,000 रुपये का घाटा25,000 रुपये की कमाई25,000 रुपये का घाटा
5% चढ़े50,000 रुपये की कमाई25,000 रुपये का घाटा25,000 रुपये की कमाई

इसलिए आंशिक हेज में गिरावट का दर्द आधा रहता है। लेकिन चढ़ाव का फायदा भी आधा बचता है।

यानी यह बीच का रास्ता है, जिसमें डर और लालच दोनों कम रहते हैं।

Futures के अलावा Options से बचाव का रास्ता

इसके अलावा, ऑप्शन से सुरक्षा के तरीके भी देखे जा सकते हैं।

लेकिन options में premium IV के साथ भी बदलता है। इसलिए वेगा (vega kya hota hai in hindi) समझना काम आता है।

Futures Hedge कब हटाएं? निकलने का सही समय कैसे तय करें

हेज एक अस्थायी ढाल है, हमेशा की आदत नहीं। इसलिए इसे हटाने का समय पहले से तय रखिए। वरना घबराहट में गलत समय पर फैसला हो जाता है।

हेज हटाने की आम स्थितियां

नीचे कुछ आम स्थितियां हैं जिनमें लोग हेज हटाने पर सोचते हैं।

  • सबसे पहले, खतरा निकल गया: जिस घटना के लिए लिया था, वह बीत गया।
  • दूसरा, Expiry पास आ गई: तब रोलओवर या बंद करना तय करना पड़ता है।
  • तीसरा, मूल कारण बदल गया: पोर्टफोलियो या आपकी योजना नई हो गई।
  • आखिर में, लागत बढ़ती दिख रही है: हेज का खर्च फायदे से भारी पड़ने लगा।

हेज हटाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

साथ ही, बाज़ार में नई खरीदारी जुड़ रही है या नहीं, यह देखना भी काम आता है। इसमें लॉन्ग बिल्ड ( long build up kya hota hai ) मदद करता है।

लेकिन हेज हटाना भी एक सौदा है। इसमें भी भाव का जोखिम है। इसलिए स्टॉप लॉस कैसे लगाएं जैसी आदत यहां भी काम आती है।

Futures Hedge अधूरा क्यों रह जाता है? Basis और पोर्टफोलियो की अलग चाल

हेज कभी सौ प्रतिशत सही नहीं बैठता। इसे अधूरा हेज कहते हैं। इसके दो बड़े कारण हैं।

कारण 1: पोर्टफोलियो और Nifty की अलग चाल

पहला कारण है कि आपके शेयर कभी Nifty से ज़्यादा गिरते हैं। कभी वे कम गिरते हैं।

उदाहरण के लिए, Nifty 5% गिरे और पोर्टफोलियो 6%। तब नुकसान 60,000 रुपये होता है। जबकि futures की कमाई 50,000 रुपये रहती है। नतीजतन 10,000 रुपये का घाटा बच जाता है।

इसी तरह, Nifty 5% चढ़े और पोर्टफोलियो केवल 4% चढ़े। तब कमाई 40,000 रुपये होती है। पर futures का घाटा 50,000 रुपये है। इसलिए 10,000 रुपये का शुद्ध घाटा रहता है।

कारण 2: Basis Kya Hota Hai?

दूसरा कारण है basis। यह आज के भाव और futures के भाव का अंतर है।

यह अंतर रोज़ बदलता है। इसलिए हेज कभी सटीक नहीं रहता।

साथ ही, निफ्टी 50 में शामिल कंपनियों की बनावट जितनी आपके पोर्टफोलियो से अलग होगी, फर्क उतना बड़ा दिखेगा।

Hedging Ka Nuksan: शुरुआती लोगों की 5 बड़ी गलतियां

हेजिंग का नुकसान तब होता है जब लोग इसे सुरक्षा की जगह कमाई का साधन बना लेते हैं।

Hedging में होने वाली 5 आम गलतियां

नीचे आम गलतियां हैं।

  • सबसे पहले, गिरावट का अंदाज़ा लगाकर हेज लगाना: यह हेज नहीं, सीधी दिशा की शर्त है।
  • दूसरी, पूरे पोर्टफोलियो से बड़ा सौदा करना: इससे हेज खुद जोखिम बन जाता है।
  • तीसरी, Margin का अतिरिक्त पैसा न रखना: बाज़ार चढ़ने पर खाता अचानक खिंच सकता है।
  • चौथी, हेज लगाकर भूल जाना: रोलओवर और खर्च की तारीख छूट जाती है।
  • आखिर में, Lot का हिसाब गलत लगाना: पुरानी lot size से गणना करना।

इन गलतियों से कैसे बचें

हेज से पहले सोचिए कि क्या थोड़ा हिस्सा बेच देना सस्ता विकल्प है। कभी-कभी सबसे सरल हल ही सबसे कम खर्चीला होता है।

इसके अलावा, शॉर्ट सेलिंग की पूरी समझ बताती है कि उलटा सौदा खोलने पर घाटे की सीमा क्यों नहीं होती।

अगर आप अभी सीख रहे हैं, तो असली पैसे से पहले कागज़ पर अभ्यास कीजिए। साथ ही, Stock Pathshala के वेबिनार आधार मज़बूत करने में मदद करते हैं।

क्या आप भी futures से अपने पोर्टफोलियो को गिरावट में सुरक्षित रखना सीखकर अपना पहला hedge सही तरीके से लगाना चाहते हैं?

सिर्फ videos देखकर strategy नहीं आती, असली charts पर practice और mentor के जवाब ही फर्क बनाते हैं।

हमारी live classes में आप मोबाइल से जुड़ सकते हैं, सवाल पूछ सकते हैं और step by step सीख सकते हैं। कोई तय बैच नहीं है और मुनाफे या घाटे की गारंटी भी नहीं है।

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निष्कर्ष

संक्षेप में, short Nifty futures पोर्टफोलियो को गिरावट से बचाता है, लेकिन चढ़ाव का फायदा भी रोकता है। इसलिए margin, रोलओवर और basis के कारण यह मुफ्त नहीं है।

उदाहरण के लिए, हमारे 10 लाख के उदाहरण में 2 lot बेचने से गिरावट का घाटा लगभग बराबर हो गया। पर चढ़ाव का फायदा भी चला गया।

इसलिए हेज को अस्थायी ढाल मानिए, कमाई का तरीका नहीं। साथ ही, हर बार लगाने से पहले पूछिए: क्यों, कितना और कब हटाऊंगा।

आखिर में, शुरुआत कागज़ पर अभ्यास से कीजिए, फिर बहुत छोटे आकार से।

अस्वीकरण: यह लेख केवल शिक्षा के लिए है, निवेश सलाह नहीं। सभी उदाहरण काल्पनिक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

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