पहली बार option chain खोलते ही कई लोग सोचते हैं कि premium तो सिर्फ 100 रुपये है, फिर खाते से 5,000 रुपये क्यों कट रहे हैं। इसका जवाब lot size kya hota hai समझने में छिपा है।
इस लेख में लॉट का मतलब, उसके कारण और लागत निकालने का तरीका सरल भाषा में है। सभी संख्याएं सिर्फ समझाने के लिए हैं।
Lot Size Meaning in Hindi
सब्ज़ी मंडी में आप एक-एक अंडा नहीं खरीदते, दर्जन या ट्रे में खरीदते हैं। ऑप्शन बाज़ार में भी आप एक-एक इकाई नहीं खरीद सकते, एक तय गठरी में ही सौदा होता है।
उस तय गठरी को lot कहते हैं। एक lot में जितनी इकाई होती हैं, वही lot size है।
Lot Size का मतलब और Stock Size
मान लीजिए किसी contract का lot size 50 है। इसका अर्थ है कि कम से कम 50 इकाई का सौदा करना पड़ेगा, इससे कम नहीं।
आप चाहें तो 1 lot, 2 lot या 3 lot ले सकते हैं। लेकिन 1 lot में 50 की जगह 30 इकाई नहीं मिलेंगी।

नीचे की सूची में lot से जुड़ी तीन बुनियादी बातें हैं।
- न्यूनतम सौदा: आप कम से कम 1 lot ही खरीद या बेच सकते हैं।
- गुणज में सौदा: इसके बाद 2, 3 या उससे ज़्यादा lot लिए जा सकते हैं।
- हर contract का अलग माप: हर index और हर stock का lot size अलग होता है।
Lot Size Kyun Hota Hai?
यह नियम परेशान करने के लिए नहीं बना है। इसके पीछे बाज़ार को सुचारू रखने के कुछ सीधे कारण हैं।
- सौदों में एकरूपता: सब एक ही माप में सौदा करते हैं, इसलिए खरीदार और विक्रेता आसानी से मिल जाते हैं।
- बहुत छोटे सौदों से बचाव: एक-दो इकाई के अनगिनत सौदे व्यवस्था पर बोझ डालते हैं।
- निपटान में आसानी: गणना और लेन-देन का हिसाब साफ रहता है।
- उचित मूल्य का दायरा: एक्सचेंज चाहता है कि contract का कुल मूल्य बहुत छोटा या बहुत बड़ा न रहे।
इसी वजह से दोनों पक्ष एक ही माप पर मिलते हैं। उनकी भूमिका का फर्क option buyer aur option seller me kya fark hota hai में अलग से समझाया गया है।
ये सब नियम इसलिए हैं क्योंकि ऑप्शन एक डेरिवेटिव की श्रेणी का साधन है, जहां contract के नियम पहले से तय रहते हैं।
इसलिए यह मत सोचिए कि lot आपका विकल्प है। यह contract की बनावट का हिस्सा है, और इसे बदला नहीं जा सकता।
Option Lot Size से Contract Value कैसे निकालें?
लॉट समझने के बाद अगला सवाल है कि एक lot की कुल कीमत क्या हुई। सूत्र बहुत सरल है।
कुल मूल्य = भाव × lot size
उदाहरण के लिए, अगर index का भाव 20,000 है और lot size 50 है, तो कुल मूल्य 20,000 × 50 = 10,00,000 रुपये बनता है। यह सिर्फ समझाने के लिए है।
अब ध्यान दीजिए। ऑप्शन खरीदते समय आपको यह 10 लाख नहीं चुकाने पड़ते। आप सिर्फ premium चुकाते हैं, लेकिन आपका जोखिम और लाभ इसी बड़े मूल्य से जुड़ा रहता है।

यही वह कारण है जिसकी वजह से छोटी रकम से बड़ा सौदा संभव होता है। लीवरेज का असर बारीकी से समझे बिना यह कमाल भी नुकसान का रास्ता बन सकता है।
शेयर के ऑप्शन में यह कुल मूल्य भी बदलता रहता है, क्योंकि Ex Dividend Date Kya Hoti Hai वाले दिन भाव डिविडेंड जितना नीचे खुल सकता है।
Lot Size और Premium से Cost कैसे निकालें?
ऑप्शन खरीदने की असली लागत निकालना और भी सरल है। इसके लिए premium को lot size से गुणा कीजिए।
खरीदने की लागत = premium × lot size × lot की संख्या
अगर premium क्या होता है अभी साफ नहीं है, तो पहले ऑप्शन प्रीमियम का मतलब पढ़ लीजिए, फिर यह गणित और आसान लगेगा।
Premium कितना होगा, यह इस पर भी टिका है कि आपने कौन सा strike चुना। इसकी बुनियाद strike price in hindi में आसान उदाहरणों के साथ है।
नीचे की तालिका में lot size 50 मानकर अलग-अलग premium की लागत दिखाई गई है। सभी संख्याएं सिर्फ समझाने के लिए हैं।
| Premium (रुपये) | Lot size | Lot की संख्या | कुल लागत (रुपये) |
|---|---|---|---|
| 80 | 50 | 1 | 4,000 |
| 120 | 50 | 1 | 6,000 |
| 200 | 50 | 1 | 10,000 |
| 120 | 50 | 2 | 12,000 |
देखिए, premium वही 120 रहा, लेकिन 2 lot लेते ही लागत दोगुनी हो गई। इसमें ब्रोकरेज और अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं।
एक छोटा नियम याद रखिए: स्क्रीन पर दिखा premium एक इकाई का भाव है, आपकी जेब से जाने वाली रकम नहीं।
निफ्टी लॉट साइज़ और स्टॉक ऑप्शंस लॉट साइज़ में क्या अंतर है?
Index और stock के lot अलग-अलग होते हैं। Index में lot आम तौर पर कम इकाई का और stock में अपेक्षाकृत ज़्यादा इकाई का हो सकता है।
वजह सीधी है। हर contract के लिए कुल मूल्य एक निश्चित दायरे में रखने की कोशिश होती है, इसलिए सस्ते भाव वाले stock में इकाई ज़्यादा रखी जाती हैं।
नीचे की तालिका में दोनों की काल्पनिक तुलना है। इसमें दिए सभी lot और भाव सिर्फ समझाने के लिए हैं, असली नहीं।
| बात | Index option (काल्पनिक) | Stock options (काल्पनिक) |
|---|---|---|
| लॉट साइज़ | 50 इकाई | 300 इकाई |
| भाव | 20,000 | 500 |
| कुल मूल्य | 10,00,000 रुपये | 1,50,000 रुपये |
| premium का उदाहरण | 120 | 15 |
| एक lot की लागत | 6,000 रुपये | 4,500 रुपये |
Stock options लेने से पहले सही stock चुनना भी उतना ही ज़रूरी है। इसका तरीका how to select stocks for positional trading में मिलेगा।
Nifty lot size या किसी भी stock का असली lot कितना है, यह नीचे की सूची की तरह कई जगह बदलता है।
- हर index का अपना lot होता है।
- हर stock का अपना lot होता है।
- एक ही contract का lot समय के साथ बदल भी सकता है।
इसलिए किसी लेख, वीडियो या पुराने नोट्स में लिखी संख्या को आज का सच मत मानिए।
Order से पहले Nifty Lot Size या Stock Options Lot Size कैसे Check करें?
ऑर्डर लगाने से पहले एक छोटा सा ठहराव आपके पैसे की बड़ी बचत कर सकता है। नीचे के तीन कदम उसी ठहराव को आसान बनाते हैं।
पहली, चुने हुए contract का वर्तमान lot size। दूसरी, premium को उससे गुणा करके निकली लागत। तीसरी, आप कितने lot लेने वाले हैं।
अक्सर लोग lot की संख्या बदलकर स्क्रीन पर लागत देखते हैं और तभी अंदाज़ा लगता है कि रकम उनकी सोच से कितनी बड़ी है।
Lot Size Kaise बदलता Hai?
कई शुरुआती लोग मानते हैं कि lot हमेशा एक जैसा रहता है, पर ऐसा नहीं है। एक्सचेंज समय-समय पर इसे बदलता रहता है।
कारण सीधा है। जब index या stock का भाव काफी ऊपर या नीचे चला जाता है, तो contract का कुल मूल्य तय दायरे से बाहर चला जाता है। तब एक्सचेंज lot को नए सिरे से तय करता है।
भाव में बड़े बदलाव की वजह कंपनी के नतीजे भी हो सकते हैं। कंपनी अपनी संपत्ति से कितना कमाती है, यह रिटर्न ऑन एसेट्स क्या होता है से परखा जा सकता है।
मान लीजिए lot 50 से बढ़कर 75 हुआ और premium 100 ही रहा। तब लागत 5,000 से बढ़कर 7,500 रुपये हो जाएगी। यह सिर्फ समझाने के लिए है।
साथ ही premium में हर 10 रुपये की चाल का असर भी 500 से बढ़कर 750 रुपये हो जाएगा। यानी बदलाव का असर लागत और जोखिम, दोनों पर पड़ता है।
ज़रूरी: वर्तमान lot size हमेशा NSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जांचिए। एक्सचेंज और SEBI के नियमों की जानकारी भी वहीं से सत्यापित करें।
कुल प्रक्रिया क्रम से समझनी हो, तो ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे करते हैं पढ़ने के बाद आपको lot, premium और खाते के संबंध की पूरी तस्वीर मिल जाएगी।
Lot Size Kya Hota Hai: Risk से रिश्ता, Premium के हर Rupee का असर
Lot जितना बड़ा, हर रुपये की चाल का असर उतना बड़ा। यही बात जोखिम का असली मतलब है।
लॉट size 50 पर premium के हर 1 रुपये की चाल से आपको 50 रुपये का फर्क पड़ता है। नीचे की तालिका में तीन स्थितियां हैं, सिर्फ समझाने के लिए।
| स्थिति | Premium बदलाव | लाभ या हानि (रुपये) |
|---|---|---|
| premium 120 से 150 | +30 | +1,500 |
| premium 120 से 90 | -30 | -1,500 |
| premium 120 से 0 | -120 | -6,000 |
तीसरी पंक्ति देखिए। Premium शून्य हुआ तो पूरी लागत डूब गई। बाज़ार की चाल निश्चित नहीं होती, इसलिए यह स्थिति असंभव नहीं है।
कई लोग अपने नुकसान होने के सामान्य कारण तब समझते हैं जब नुकसान हो चुका होता है। बेहतर है कि यह समझ पहले ही बना लें।
इसके बाद सवाल कुल बजट का आता है, और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक lot की लागत के अलावा शुल्क और नुकसान की गुंजाइश भी रखनी पड़ती है।
पूरा हिसाब option trading ke liye kitna paisa chahiye लेख में है।
Lot Size In Hindi: Beginners की 3 बड़ी गलतियां
Lot size समझने में कुछ गलतियां बार-बार दिखती हैं। नीचे की सूची में तीन मुख्य हैं।
- Premium को पूरी लागत मानना: सच में लागत premium × lot size होती है।
- एक साथ कई lot ले लेना: एक lot से शुरू करना हमेशा समझदारी है।
- पुराना lot size याद रखना: एक्सचेंज के बदलाव के बाद गणित गलत हो जाता है।
इसके अलावा पूरी पूंजी में से बाज़ार में कितना हिस्सा लगाना है, यह stock market mein kitna paisa lagana chahiye से तय कीजिए।
सीखते समय असली पैसा दांव पर लगाना ज़रूरी नहीं। पेपर ट्रेडिंग से अभ्यास करके आप lot की गणना बिना जोखिम सीख सकते हैं।
क्या आप भी option खरीदने से पहले lot का सही हिसाब लगाना सीखकर अपना पहला trade सही तरीके से लेना चाहते हैं?
सिर्फ articles पढ़कर लागत और जोखिम का अंदाज़ा नहीं आता, असली charts पर practice और mentor के जवाब ही फर्क बनाते हैं।
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निष्कर्ष
आखिर में lot size kya hota hai, यह छोटे में समझ लीजिए। यह एक contract में मौजूद इकाई की तय संख्या है, जिससे कम का सौदा नहीं हो सकता।
लागत निकालने का सूत्र है premium × lot size × lot की संख्या। इसलिए स्क्रीन के premium को पूरी रकम मत मानिए।
Lot size बदलता रहता है, इसलिए हर ऑर्डर से पहले NSE पर वर्तमान संख्या जांचिए। यह जानकारी सिर्फ शिक्षा के लिए है, निवेश की सलाह नहीं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है, निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं। सभी संख्याएं काल्पनिक हैं और सिर्फ समझाने के लिए हैं। बाज़ार का लाभ तय नहीं होता, नुकसान भी हो सकता है और पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं देता। व्यक्तिगत फैसले से पहले SEBI-पंजीकृत सलाहकार से परामर्श लीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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