Dividend Wale Share Kaise Chune? जानिए मजबूत और सुरक्षित शेयर चुनने का सही तरीका

dividend wale share kaise chune

क्या आप भी जानना चाहते हैं कि dividend wale share kaise chune? मक़सद है कि हर साल कुछ रकम मिलती रहे और नुकसान का डर कम रहे।

ज़्यादातर लोग सबसे ऊँचा डिविडेंड ढूँढने लगते हैं, और गलती यहीं से शुरू होती है। इस लेख में 6 आसान जाँच हैं, जो आप खुद कर सकते हैं।

कोई टिप नहीं, कोई वादा नहीं, सिर्फ़ सही तरीक़ा।

Dividend Wale Share Kaise Chune In Hindi

डिविडेंड का मतलब है कि कंपनी अपने मुनाफ़े का एक हिस्सा शेयरधारकों को देती है। सवाल बस यह है कि किस कंपनी का डिविडेंड भरोसे लायक है।

अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी बड़े ज्ञान की ज़रूरत नहीं है। कुछ सीधी जाँचें आपको बता देती हैं कि डिविडेंड टिकेगा या नहीं।

कदमक्या देखना हैमकसद
1कम से कम 5 साल का रिकॉर्डडिविडेंड नियमित है या नहीं
2कमाई के मुक़ाबले दिया गया हिस्साडिविडेंड टिकाऊ है या नहीं
3डिविडेंड यील्डभाव के मुक़ाबले मिलने वाली रकम
4कमाई और नकदी का प्रवाहडिविडेंड देने की असली ताक़त
5कर्ज़ का स्तरकर्ज़ डिविडेंड पर बोझ तो नहीं
6कारोबार और क्षेत्रआगे भी कमाई टिकेगी या नहीं
मजबूत और सुरक्षित डिविडेंड शेयर चुनने के 6 आसान तरीके और उनकी जाँच की प्रक्रिया को दर्शाने वाला इन्फोग्राफिक।
जानिए मजबूत और सुरक्षित डिविडेंड शेयर चुनने के 6 बुनियादी तरीके।

Step 1: रेगुलर डिविडेंड देने वाली कंपनी का रिकॉर्ड कैसे चेक करें?

सबसे पहले पिछले कम से कम 5 साल का रिकॉर्ड देखिए। एक साल का डिविडेंड तो कोई भी कंपनी दे सकती है।

देखिए कि रकम हर साल दी गई या बीच में रुकी। यह भी देखिए कि रकम बढ़ी, स्थिर रही या कभी घटी।

थोड़ा ऊपर-नीचे होना सामान्य है, क्योंकि कमाई हर साल एक जैसी नहीं रहती। लेकिन बार-बार बंद होना या अचानक बड़ी कटौती चेतावनी है।

डिविडेंड की घोषणा के बाद रकम सीधे आपके बैंक खाते में पहुँचती है। इसलिए शुरुआत में dividend kaise milta hai यह जान लेना काम आता है।

एक सीधा तरीक़ा है। पिछले पाँच सालों के डिविडेंड एक कागज़ पर लिखिए और देखिए कि रेखा किस तरफ़ जा रही है।

अगर रकम हर साल थोड़ी बढ़ रही है, तो कंपनी का रवैया अच्छा दिखता है। अगर रकम कभी बहुत ज़्यादा और कभी शून्य है, तो उस पर टिके रहना कठिन है।

एक बात और याद रखिए। पुराना रिकॉर्ड अच्छा होने का मतलब यह नहीं कि आगे भी वैसा ही रहेगा।

Step 2: कमाई का कितना हिस्सा बँटता है

अब देखिए कि कंपनी अपनी कमाई का कितना हिस्सा डिविडेंड में दे रही है। यह जाँच बताती है कि डिविडेंड आगे भी चल सकता है या नहीं।

जब कंपनी कमाई से ज़्यादा रकम बाँटने लगे, तो वह लंबे समय तक नहीं चल सकती। इसे समझने के लिए डिविडेंड पेआउट रेशियो का अलग लेख पढ़ लीजिए।

यहाँ इतना काफ़ी है कि बहुत ऊँचा हिस्सा सँभलकर देखने लायक है। कोई एक पक्की संख्या सब कंपनियों पर लागू नहीं होती।

कई बार नई और बढ़ती कंपनी कम हिस्सा बाँटती है, क्योंकि उसे कारोबार में पैसा लगाना होता है। पुरानी और स्थिर कंपनी ज़्यादा हिस्सा बाँट सकती है।

इसलिए तुलना हमेशा मिलते-जुलते कारोबार में कीजिए।

Step 3 में ऊँची Yield धोखा क्यों बन सकती है

अब भाव के मुक़ाबले मिलने वाली रकम देखिए। इसे डिविडेंड यील्ड का मतलब समझकर पढ़ना ज़्यादा आसान होता है।

यील्ड ऊँची दिखे तो मन ललचाता है। लेकिन यहाँ एक फंदा है, जिसे यील्ड ट्रैप कहते हैं।

ऊँची यील्ड हमेशा अच्छी क्यों नहीं होती?

यील्ड भाव पर निर्भर करती है। भाव गिरे तो रकम वही रहने पर भी यील्ड ऊपर दिखने लगती है।

नीचे की तालिका सिर्फ़ समझाने के लिए है। इसमें रकम काल्पनिक है और कोई असली कंपनी नहीं है।

स्थितिभाव (रुपये)सालाना डिविडेंड (रुपये)यील्ड
शुरुआत में10044%
भाव आधा होने पर5048%
डिविडेंड घटने पर5024%

पहली और दूसरी पंक्ति देखिए। रकम नहीं बदली, फिर भी यील्ड दोगुनी दिखने लगी, क्योंकि भाव गिर गया।

ऐसा अक्सर तब होता है जब बाज़ार को कंपनी की कमाई पर शक होता है। ऐसे वक़्त में यह भी देखिए कि मालिक क्या कर रहे हैं।

प्रमोटर शेयर खरीदे तो क्या होता है समझने से भाव गिरने पर उनके क़दम का मतलब साफ़ होता है।

तीसरी पंक्ति बताती है कि कटौती के बाद यील्ड फिर नीचे आ जाती है। इसीलिए बहुत ऊँची यील्ड का जोखिम समझिए।

वह कंपनी की मज़बूती नहीं, गिरते भाव की निशानी भी हो सकती है।

Step 4: कमाई और नकदी की स्थिरता

डिविडेंड असल में नकदी से दिया जाता है, सिर्फ़ कागज़ी मुनाफ़े से नहीं। इसलिए पिछले कुछ सालों की कमाई देखिए कि वह बढ़ रही है, टिकी है या गिर रही है।

मुनाफ़ा दिखे लेकिन हाथ में नकदी न आए, तो डिविडेंड का आधार कमज़ोर है। नकदी प्रवाह विवरण पढ़ने का तरीक़ा सीख लें, तो यह फ़र्क साफ़ दिखने लगता है।

एक-दो साल का अचानक उछाल भी धोखा दे सकता है। कोई एक बार की बड़ी कमाई हो तो सावधान रहिए।

साल-दर-साल कमाई का रुख देखिए। जो कंपनी हर साल कमाई करके नकदी जोड़ती है, उसके पास डिविडेंड देने की ज़्यादा गुंजाइश होती है।

आपकी कुल डिविडेंड रकम आपके शेयरों की संख्या पर टिकी होती है। F&O वाले शेयरों में सौदा lot में होता है, इसलिए लॉट साइज़ क्या होता है भी जान लीजिए।

Step 5: कर्ज़ का स्तर

कर्ज़ ज़्यादा हो तो कंपनी को पहले ब्याज चुकाना पड़ता है। डिविडेंड उसके बाद की बात है।

इसलिए कर्ज़ और अपनी पूँजी का अनुपात देखिए। इसके लिए कर्ज़ और इक्विटी का अनुपात एक आसान पैमाना है।

कम कर्ज़ वाली कंपनी में मुश्किल दौर में भी डिविडेंड बचने की गुंजाइश ज़्यादा रहती है। फिर भी हर क्षेत्र का कर्ज़ का ढाँचा अलग होता है।

इसलिए तुलना एक ही क्षेत्र की कंपनियों में कीजिए।

Step 6: कारोबार और क्षेत्र की जाँच

अब कारोबार को देखिए। क्या लोग इसके उत्पाद या सेवा का इस्तेमाल हर हाल में करते रहेंगे, या माँग मौसम और चक्र पर टिकी है?

स्थिर माँग वाले कारोबार में कमाई आम तौर पर कम ऊपर-नीचे होती है। चक्र वाले क्षेत्र में अच्छे साल में डिविडेंड ऊँचा और बुरे साल में कम या बंद हो सकता है।

कंपनी की ताक़त और भविष्य को परखने की पूरी सोच फंडामेंटल एनालिसिस क्या होता है की बुनियादी समझ में मिलती है।

कारोबार समझ में न आए तो उसमें पैसा लगाना भी जोखिम है। जो काम आप समझ सकते हैं, पहले वहीं से शुरू कीजिए।

यह भी देखिए कि कंपनी के पास आगे बढ़ने की जगह है या नहीं। बढ़ती कंपनी अक्सर मुनाफ़ा कारोबार में लगाती है, इसलिए कम डिविडेंड देना हमेशा बुरी बात नहीं है।

अच्छे डिविडेंड शेयर कैसे पहचानें? कंपनी A और कंपनी B की तुलना

अब सब जाँच एक साथ रखकर देखते हैं। नीचे दो काल्पनिक कंपनियों की तुलना है, जो सिर्फ़ समझाने के लिए है।

बातकंपनी Aकंपनी B
भाव (रुपये)20080
सालाना डिविडेंड (रुपये)68
यील्ड3%10%
प्रति शेयर कमाई (रुपये)206
कमाई का कितना हिस्सा बँटालगभग 30%लगभग 133%
कमाई का रुखधीरे-धीरे बढ़ता हुआलगातार गिरता हुआ
कर्ज़कमबढ़ता हुआ

कंपनी B की यील्ड ऊँची है, पर वह कमाई से ज़्यादा रकम बाँट रही है। ऊपर से उसकी कमाई भी गिर रही है।

ऐसी हालत में कटौती का ख़तरा बढ़ जाता है। कंपनी A की यील्ड मध्यम है, पर कमाई स्थिर है और कर्ज़ कम है।

यह सिर्फ़ उदाहरण है, किसी को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है। सीख यह है कि अकेली यील्ड कुछ नहीं बताती।

सारी जाँच साथ में पढ़ना ही असली तरीक़ा है।

यील्ड के साथ-साथ Ex Dividend Date Kya Hoti Hai भी देखिए, क्योंकि उस दिन तक शेयर आपके पास न हो तो डिविडेंड नहीं मिलता।

Dividend Wale Share Kaise Dhundhe: स्क्रीनर और एक्सचेंज से खोजें मजबूत स्टॉक

अब शेयर ढूँढने का सवाल। कई स्क्रीनर टूल आपको डिविडेंड, यील्ड, कर्ज़ और कमाई के आधार पर कंपनियाँ छाँटने देते हैं।

एक्सचेंज की वेबसाइट पर कंपनियों की घोषणाएँ और वार्षिक रिपोर्ट भी मिलती हैं। वहाँ दिया गया डिविडेंड का इतिहास सबसे भरोसेमंद स्रोत है।

अगर डिविडेंड की बुनियाद अभी धुँधली है, तो पहले dividend meaning in hindi को आराम से समझ लीजिए। फिर आगे की बातें और आसान लगेंगी।

स्क्रीनर सिर्फ़ पहली छलनी है, अंतिम फ़ैसला नहीं। छाँटी गई कंपनियों की जाँच छह क़दमों से खुद कीजिए।

शेयर पसंद आ जाए तो खरीदने से पहले तारीख़ देखिए। डिविडेंड उन्हीं को मिलता है जिनका नाम तय दिन की सूची में हो।

उस दिन को समझने के लिए रिकॉर्ड डेट क्या होती है पढ़िए।

जानकारी कई जगह अधूरी या पुरानी हो सकती है। इसलिए कोई भी आँकड़ा मानने से पहले कंपनी की अपनी घोषणा से मिला लीजिए।

Dividend Wale Share Kaise Chune: ये 6 गलतियाँ भूलकर भी न करें

नीचे की सूची में वे बातें हैं जिनसे बचना चाहिए। इन्हें पहले पढ़ लेंगे तो आधी गलतियाँ वैसे ही बच जाएँगी।

  • सिर्फ़ ऊँची यील्ड देखकर चुनना: भाव गिरने से भी यील्ड बढ़ती है।
  • एक साल का डिविडेंड देखना: कम से कम 5 साल का रिकॉर्ड ज़रूरी है।
  • कमाई से ज़्यादा बँटता डिविडेंड नज़रअंदाज़ करना: यह लंबे समय तक नहीं चलता।
  • कर्ज़ को अनदेखा करना: भारी कर्ज़ डिविडेंड घटा सकता है।
  • किसी के बताए नाम पर भरोसा करना: अपनी जाँच ज़्यादा भरोसेमंद है।
  • डिविडेंड को पक्की कमाई मानना: बोर्ड इसे कभी भी घटा या रोक सकता है।

डिविडेंड के नाम पर जल्दी कमाई वाले ऑप्शन ट्रेड में न कूदें। वहाँ का सौदा अलग है, इसलिए पहले स्ट्राइक प्राइस क्या होता है समझिए।

बेस्ट डिविडेंड स्टॉक चुनने का सही तरीका: यह रणनीति किसके लिए है उपयोगी?

यह तरीक़ा उनके लिए है जो नियमित आय की सोच रखते हैं और लंबे समय के लिए निवेश करते हैं। जल्दी कमाई चाहने वालों के लिए यह नहीं है।

लंबी सोच में शुरुआत जल्दी करना मदद करता है। शेयर मार्केट में जल्दी निवेश करना क्यों ज़रूरी है यही बात खोलकर समझाता है।

डिविडेंड मिलने पर भी शेयर का भाव नीचे जा सकता है। इसलिए जोखिम सहने की क्षमता, आमदनी और लक्ष्य के हिसाब से फ़ैसला कीजिए।

व्यक्तिगत फ़ैसले से पहले SEBI से पंजीकृत सलाहकार से बात कीजिए। डिविडेंड पर कर लगता है, इसलिए नियम आधिकारिक वेबसाइट या अपने सीए से जाँच लें।

चेकलिस्ट पढ़ना आसान है, पर असली आँकड़ों पर उसे लगाना सीखना ज़रूरी है।

हमारी live classes में आप विशेषज्ञों से सवाल पूछ सकते हैं और step by step सीख सकते हैं।

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निष्कर्ष

संक्षेप में, dividend wale share kaise chune का जवाब छह जाँचों में है।

ये हैं 5 साल का रिकॉर्ड, कमाई का हिस्सा, यील्ड, नकदी, कर्ज़ और कारोबार।

अकेली ऊँची यील्ड कभी पूरी तस्वीर नहीं बताती।

इसलिए सारी जाँच साथ में कीजिए और किसी के बताए नाम पर आँख मूँदकर भरोसा मत कीजिए।

सावधानी से की गई जाँच किसी भी ऊँचे आँकड़े से ज़्यादा काम आती है।

अस्वीकरण: यह लेख सिर्फ़ शिक्षा के लिए है। इसमें दिए सभी आँकड़े काल्पनिक हैं और यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाज़ार में जोखिम है और पिछला रिकॉर्ड भविष्य की गारंटी नहीं देता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

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